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Monday, January 30, 2012

दिल्ली की यादें, घनघोर सेंटीपना विथ लोटस ऑफ़ बकवास

इस बार बहुत सी बकवास बातें हैं...शाम में बैठ कर जितनी बक-बक करने का मन किया सब रेकोर्ड कर दिए...ध्यान रखिये कि आप ये ब्लॉग एकदम अपने पूरे रिक्स पर पढ़ रहे हैं :) 

यहाँ कोई गारंटी नहीं है...क्या है कि इन्टरनेट पर बहुत सा सन्नाटा है...तो हमने अपनी आवाज़ से थोड़ा ठहरे हुए पानी में कंकर/पत्थर/ढेला मारने की कोशिश की है :) 

और हाँ...शुरुआत में जो गाना है वो बहुत ख़राब है...उसका बुराई कोई नहीं करेगा ठीक है?


14 comments:

अनुपमा पाठक said...

तालियाँ... तालियाँ... तालियाँ!!!
हर क्यूँ (?) का जवाब कहाँ होता है, भई...
सन्नाटों में गूंजती इस आवाज़ को हम बेहद प्यार करते हैं...
'बकवास',(borrowing your words)नियमित रूप से जारी रहे:)

सागर said...

hunh !

Archana said...

आय!हाय!...आज ही मैं भी मिली अचानक ३० साल बाद अपनी सहेली से.....और बस ऐसे ही बकवास करने का मन किया ...हा हा ब बाय!!!!!!!!!!!!
(अभि ने पहुंचाया है यहां तक,तो Thanks अभि)

देवांशु निगम said...

बकवास का जिम्मा आपका कबसे हो गया? इसपे तो हम जैसे लोगो का अधिकार है !!! :)
एडबाजी चाँद की हो रही है या कैमरे की ? कोई बात नहीं फिलहाल दोनों ही खूबसूरत है...

:) :) :) :)

abhi said...

अरे हम ऐसे ही टिके रहेंगे...आप अपनी बकवास जारी रखिये एकदम ऐसे ही मस्त फ्लो में...

Madhuresh said...

Thi to poori bakwaas hi, aptly...par sunane mein achhi hi lagi :)
aur ye word mast tha 'Dositiniyan'!
mujhe ek gana yaad aa gaya barbas sunte sunte..shayad achhi lage
#http://www.youtube.com/watch?v=htuPlsDVQ6A#

Puja Upadhyay said...

Thanks for the consolation prize @madhuresh :) :) gaana suna maine.

I have heard better ones :) par jab jo man kare wo kar dena chahiye aisa mera zor se man-na hai :) so thanks.
Most of the people who hear my 'bakwas' on this blog here somehow know me...you are the only one to have stumbled yourself into this mess...so you are my special listener :D
Thanks for coming over and then breaking your head over trying to say something nice to me ;) you are too kind :D
wo kahte hain na...hausla-afzahi ke liye shukriya types thank you.
Cheers! :)

mukti said...

हुँह! हमसे नहीं मिलोगी, तो यही सुनना पड़ेगा.

Madhuresh said...

haha.. hmmm..i've stumbled myself into this mess... lekin isme ek swaarth chhipa hai mera.. :) actually hum bhi Bihar ke ek chhote se town se hain.. aur bak-bak meri bhi bachpan se visheshta rahi hai ;) baanak aisa bana ki padhai ke silsile mein US ana pada. bahut chhota hun abhi... to ghar se itni door rehna bhata nahi hai. Upar se kambakht is angrezi jagah par Hindi bolne-sunane ko taras jaate hain.. kabhi kabhi kavitaon se man behla lete hain... aur fir aapki ye podcast tasalli deti hai ki duniya mein kahin na kahin kuchh shor hai apne jaisa! :)

Puja Upadhyay said...

@मधुरेश...समझ सकती हूँ हिन्दी की आवाज़ें नहीं सुनने का दर्द। मेरा तो बंगलोर में ये बुरा हाल था...तुम तो पराए देश चले गए हो।

पॉडकास्ट का ब्लॉग इसलिए बनाया ही था...कि अच्छा न सही...बुरा सही...कभी कभी वाकई आवाज़ें सुनने को कान तरस जाते हैं। मैंने बहुत दिन हिन्दी पॉडकास्ट गूगल किया पर कुछ मिला नहीं...तो हम जो जिम्मेदार प्राणी हैं सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधे पर उठा ली :)

स्वागत है :) यहाँ माल-पानी आता रहेगा :) आते रहना।

Smriti Sinha said...

i love you too sweetheart :):)

Gautam Anand said...

Thanks for your kind words on my blog !!
You may be right that I didn't try hard enough .. but I'm still waiting :) [may be thts an excuse for my laziness :) ]

Nyways it gives me a chance to visit yours ... nd its always a pleasure to read ur creations ..

But how did u get knw .. why I stopped writing ?

प्रवीण पाण्डेय said...

What next?

Puja Upadhyay said...

Have recorded a round of midnight madness...this time I thought i'll listen to it myself before posting it.

So its still there in the drafts :D now will record something someday and post. today does sound a good day though!